बोलता सच,नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता पक्का होने के बाद भारतीय शेयर बाजार में मजबूती आ सकती है। उनका मानना है कि मौजूदा टैरिफ अधिक नहीं होने चाहिए और इन्हें 20 प्रतिशत से नीचे लाया जाना चाहिए।
सीए कुशल लोढ़ा से बातचीत में राजन ने कहा कि हाल के समय में भारतीय शेयर बाजार पर दबाव रहा है, जबकि अमेरिकी बाजार में बेहतर तेजी देखने को मिली है। इसके पीछे एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उसके प्रभावी इस्तेमाल को बताया।
AI को लेकर उत्साह का चक्र स्वाभाविक
राजन ने कहा कि जब भी कोई नई तकनीक आती है, तो शुरुआत में भारी उत्साह देखा जाता है, जो बाद में निराशा में बदल सकता है। लेकिन समय के साथ वही तकनीक हकीकत बनकर सामने आती है। उन्होंने डॉट-कॉम बूम का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेजन उस दौर में तेजी से उभरा, फिर गिरा, लेकिन लंबी अवधि में निवेश करने वालों को भारी फायदा हुआ। आज अमेजन एआई और क्लाउड सेवाओं के कारण फिर मजबूत स्थिति में है।
भारत से अमेरिका की ओर गया निवेशकों का उत्साह
भारतीय और अमेरिकी बाजारों के वैल्यूएशन की तुलना करते हुए राजन ने कहा कि फिलहाल निवेशकों का उत्साह भारत से अमेरिका की ओर शिफ्ट हुआ है। एक समय था जब भारत को लेकर जबरदस्त उम्मीदें थीं, लेकिन टैरिफ और अन्य वैश्विक कारणों से फिलहाल कुछ निराशा देखने को मिल रही है।
टैरिफ विवाद सुलझते ही लौटेगी रफ्तार
राजन ने उम्मीद जताई कि अमेरिका के साथ टैरिफ वार्ताओं का समाधान निकलने के बाद भारतीय बाजार फिर से गति पकड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर, यानी 10 से 20 प्रतिशत के बीच टैरिफ रखना चाहिए। ऐसा होने पर भारत की विकास संभावनाएं फिर से मजबूत होंगी।
लंबी अवधि में शेयर बाजार को लेकर भरोसा
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ठीक-ठाक रफ्तार से आगे बढ़ रही है, लेकिन टैरिफ को लेकर अनिश्चितता विकास पर असर डाल रही है। राजन के मुताबिक, जैसे ही विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बाजार भी बेहतर प्रदर्शन करेगा।
लंबी अवधि के निवेश को लेकर उन्होंने कहा कि ओवरवैल्यूएशन और अंडरवैल्यूएशन के दौर आते रहते हैं, लेकिन यदि भारत अपनी विकास संभावनाओं को साकार करता है, तो लंबी अवधि में शेयर बाजार से अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना है।
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