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केंद्रीय बजट 2026-27: ‘विकसित भारत’ का रोडमैप पेश, मिडिल क्लास को राहत, इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव

Bolta Sach News
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Union Budget 2026-27 A ‘Developed India’

बोलता सच,नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए ‘विकसित भारत’ की नींव को मजबूत करने वाला विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। ‘युवा शक्ति’ और आर्थिक स्थिरता पर केंद्रित इस बजट का कुल आकार लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। सरकार ने विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भारी निवेश का ऐलान किया है, साथ ही राजकोषीय अनुशासन को भी प्राथमिकता दी गई है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को GDP के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, जो चालू वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के संशोधित अनुमान से कम है।


विदेश यात्रा, शिक्षा और टैक्स फाइलिंग में बड़ी राहत

आम करदाताओं और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने विदेश यात्रा और शिक्षा को सस्ता बनाने के लिए अहम घोषणाएं कीं। विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस की दर को 5–20 प्रतिशत के स्लैब से घटाकर सीधे 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है।
लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और चिकित्सा के लिए विदेश भेजी जाने वाली राशि पर भी अब केवल 2 प्रतिशत टीसीएस लगेगा।

इसके अलावा, टैक्स फाइलिंग को अधिक लचीला बनाते हुए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि व्यापक समीक्षा के बाद तैयार किया गया ‘आयकर अधिनियम 2025’ 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।


शेयर बाजार के ट्रेडर्स पर सख्ती, F&O और बायबैक नियम बदले

शेयर बाजार के निवेशकों, खासकर डेरिवेटिव ट्रेडर्स के लिए बजट के प्रावधान सख्त रहे। सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।

  • फ्यूचर्स पर STT: 0.02% से बढ़ाकर 0.05%

  • ऑप्शंस पर STT: 0.1% से बढ़ाकर 0.15%

इसके साथ ही, कंपनियों द्वारा शेयरों के बायबैक से होने वाली आय को अब शेयरधारकों के हाथों में कैपिटल गेंस माना जाएगा और उसी अनुसार टैक्स लगेगा। प्रमोटर्स द्वारा टैक्स आर्बिट्राज रोकने के लिए उन पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स का भी प्रावधान किया गया है।


इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर बड़ा निवेश

बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए सरकार ने पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले बजट के 11.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
देश के प्रमुख शहरों के बीच 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिनमें मुंबई-पुणे और दिल्ली-वाराणसी जैसे रूट शामिल हैं।

इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में जोखिम कम करने के लिए ‘इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड’ की स्थापना और शहरों को आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन्स’ की मैपिंग की जाएगी।


उद्योग और इनोवेशन के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’

औद्योगिक विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत कई बड़ी योजनाओं की घोषणा की।

  • भारत को बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने के लिए ‘बायो-फार्मा शक्ति’ योजना

  • सेमीकंडक्टर सेक्टर में आत्मनिर्भरता के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’

  • एमएसएमई सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ‘एसएमई ग्रोथ फंड’

  • TReDS प्लेटफॉर्म के जरिए एमएसएमई की क्रेडिट तक आसान पहुंच

स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती बनाने की दिशा में सरकार ने कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली 17 जीवन रक्षक दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह छूट देने का भी ऐलान किया।


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