बोलता सच,लखनऊ लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर बड़ी तैयारी में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार सीटों के आरक्षण में कोई बदलाव किए बिना ही पंचायत चुनाव कराने का मन बना चुकी है। इसका मतलब यह है कि 2026 के पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था 2021 के चुनावों की तर्ज पर ही लागू होगी।
इसी वजह से ओबीसी आरक्षण के लिए जरूरी समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव बीते कई महीनों से शासन स्तर पर लंबित पड़ा है। अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। नियमानुसार, पंचायत चुनावों में ओबीसी सीटों के आरक्षण का फॉर्म्युला तय करने के लिए आयोग का गठन आवश्यक होता है, लेकिन सरकार फिलहाल पुराने आरक्षण फॉर्म्युला के साथ चुनाव कराने की तैयारी में है।
आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायतों, ग्राम पंचायत वार्डों, क्षेत्र पंचायत वार्डों और जिला पंचायत वार्डों का पुनर्गठन कार्य पूरा कर लिया गया है। पुनर्गठन के बाद जिला पंचायत सदस्यों की संख्या में भी कमी आने वाली है। अनुमान है कि अब प्रदेश में जिला पंचायत सदस्यों की संख्या घटकर करीब 3,000 रह जाएगी।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में प्रदेश में 7,31,811 वार्डों में पंच चुने गए थे। इस बार पुनर्गठन के बाद इन वार्डों की संख्या में करीब 4,608 की कमी आने की संभावना है। इसी तरह ग्राम प्रधानों की संख्या भी घटेगी। जहां 2021 में 58,195 ग्राम प्रधान चुने गए थे, वहीं 2026 में लगभग 57,694 ग्राम प्रधान चुने जाएंगे।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार जातीय जनगणना कराने का फैसला ले चुकी है और भविष्य में आरक्षण का नया फॉर्म्युला उसी रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा। चूंकि जातीय जनगणना और उसकी रिपोर्ट में अभी समय लगेगा, इसलिए सरकार ने अगले पंचायत चुनाव में नया आरक्षण निर्धारण करने के बजाय 2021 के आरक्षण के आधार पर ही चुनाव कराने का फैसला किया है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर विभागीय अधिकारी फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं।
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