बोलता सच,महाराष्ट्र : महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद की सामान्य सभा की बैठक सोमवार को उस वक्त हंगामे में बदल गई, जब उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। बैठक के दौरान भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पार्षदों के बीच जमकर नारेबाजी, बहस और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। हालात इतने बिगड़ गए कि सदन में तनाव का माहौल बन गया।
दरअसल, अंबरनाथ नगर परिषद में लंबे समय से भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। बीते महीने हुए अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटील को जीत मिली थी, लेकिन अब उपाध्यक्ष पद का चुनाव नया सियासी विवाद बन गया है।
नगर परिषद का सियासी गणित
60 सदस्यीय नगर परिषद में वर्तमान स्थिति के अनुसार शिवसेना (शिंदे गुट) के 27 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी के चार और दो निर्दलीय पार्षद हैं। शुरुआत में भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी (AVA)’ का गठन किया था, जिससे उसके पास 32 पार्षदों का बहुमत हो गया था।
हालांकि बाद में कांग्रेस ने भाजपा का समर्थन करने वाले अपने 12 पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया। इसके बाद एनसीपी के चारों पार्षदों ने भाजपा से समर्थन वापस लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया। इससे शिवसेना की संख्या बढ़कर 32 हो गई और सदन में बहुमत उसके पक्ष में चला गया।
बैठक में क्यों मचा हंगामा
सोमवार को हुई बैठक में भाजपा ने AVA के सभी सदस्यों को अपने उम्मीदवार प्रदीप पाटील के समर्थन में वोट देने के लिए व्हिप जारी किया। लेकिन एनसीपी ने इस व्हिप को मानने से इनकार कर दिया। इस फैसले को स्थानीय शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किणीकर का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि अब AVA का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है।
इधर, शिवसेना (शिंदे गुट) ने उपाध्यक्ष पद के लिए एनसीपी के सदाशिव पाटील को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद सदन का माहौल और गरमा गया।
सदन में तीखी नोकझोंक
जैसे ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी, दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। आरोप-प्रत्यारोप के साथ गाली-गलौज तक की नौबत आ गई। गुस्से में भाजपा पार्षदों को चप्पल लहराते और शिवसेना उम्मीदवार के खिलाफ नारे लगाते हुए भी देखा गया।
फिलहाल उपाध्यक्ष पद के चुनाव का अंतिम नतीजा मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद घोषित किया जाएगा। लेकिन नगर परिषद में सत्ता को लेकर जारी यह खींचतान अभी थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
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