बोलता सच,रास्ट्रीय : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से सेना ने देश को गौरवान्वित किया। उन्होंने कहा कि इस सफल सैन्य कार्रवाई ने दुनिया के सामने भारत के दृढ़ संकल्प और संप्रभुता की रक्षा के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।
दिल्ली छावनी में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के गणतंत्र दिवस शिविर 2026 को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एनसीसी कैडेटों के योगदान की भी विशेष प्रशंसा की।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एनसीसी ने सराहनीय भूमिका निभाई। करीब 72,000 एनसीसी कैडेटों ने स्वेच्छा से नागरिक सुरक्षा उपायों में भाग लेकर खुद को ‘एनसीसी योद्धा’ के रूप में साबित किया।”
अधिकारियों के अनुसार, इन कैडेटों ने आपातकालीन अभ्यासों, रक्तदान शिविरों और विभिन्न नागरिक सुरक्षा गतिविधियों में सक्रिय सहयोग दिया।
पहलगाम हमले के जवाब में चला था ऑपरेशन सिंदूर
गौरतलब है कि 7 मई 2025 की सुबह भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। यह अभियान पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस कार्रवाई में कम से कम 100 आतंकवादियों को मार गिराया गया।
उपराष्ट्रपति ने कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों की राष्ट्र के सम्मान, संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अडिग संकल्प का एक शक्तिशाली प्रतीक है।”
गणतंत्र दिवस शिविर का उद्घाटन
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सोमवार को एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर का औपचारिक उद्घाटन भी किया। यह शिविर 28 जनवरी को प्रधानमंत्री की रैली के साथ संपन्न होगा। देशभर से कुल 2,406 एनसीसी कैडेट, जिनमें 898 बालिकाएं शामिल हैं, लगभग एक महीने तक चलने वाले इस शिविर में भाग ले रहे हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने कैडेटों को केवल प्रतिभागी नहीं, बल्कि नए भारत के राजदूत बताया। उन्होंने कहा कि ये युवा 2047 तक एक आत्मनिर्भर, मजबूत और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उपराष्ट्रपति ने कहा,
“आप सभी में मुझे एक विकसित, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत की मजबूत नींव दिखाई देती है।”
साहसी और दयालु युवाओं की जरूरत
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास को एक परिवर्तनकारी यात्रा बताते हुए कहा कि इसके केंद्र में आत्मनिर्भरता है, जिसे अनुशासित, कुशल और मूल्यों से प्रेरित युवा आगे बढ़ा रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा,
“आज के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो साहसी होने के साथ-साथ दयालु हों, तकनीकी रूप से दक्ष हों और नैतिक मूल्यों में दृढ़ हों।”
उन्होंने एनसीसी की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संगठन युवा विकास और राष्ट्र की प्रगति के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, और कैडेटों की एकता व अनुशासन की भावना देशवासियों में विश्वास और आशा का संचार करती है।
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