बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब दिया। सीएम ने कहा कि सपा बजट पर सकारात्मक बात नहीं कर पाई क्योंकि उसके पास बताने के लिए कुछ अच्छा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा जातीय संघर्षों को बढ़ावा देती है, समाज को बांटती है और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान नहीं करती।
एसआईआर पर सरकार की भूमिका से इनकार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराई जा रही है और इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा कि आयोग की गाइडलाइन के अनुसार तंत्र कार्य करता है।
सीएम के मुताबिक, एसआईआर के दौरान 2.88 करोड़ से अधिक लोग मृत, अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ऐसे नामों को फर्जी वोटर बनाकर चुनाव में इस्तेमाल करती थी और अब फॉर्म-7 के नाम पर भ्रम फैला रही है। उन्होंने फॉर्म-6, 7 और 8 की प्रक्रिया को वैधानिक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में लगे बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के साथ सपा कार्यकर्ताओं द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं, जो संवैधानिक संस्थाओं का अपमान है।
कानून व्यवस्था और विकास पर जोर
सीएम योगी ने कहा कि कानून व्यवस्था का अर्थ ‘रूल ऑफ लॉ’ है और 2017 के बाद से प्रदेश में न कर्फ्यू है, न दंगा। उन्होंने दावा किया कि यूपी ‘फियर जोन’ से ‘फेथ जोन’ में बदल गया है। महाशिवरात्रि पर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के त्रिवेणी स्नान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश पुलिस में अब 44 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मी हैं और भर्ती व प्रशिक्षण की आधुनिक व्यवस्था विकसित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है और बजट उसी दिशा में प्रस्तुत किया गया है।
अखिलेश यादव के आरोप
इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेसवार्ता में आरोप लगाया था कि एसआईआर के दौरान भाजपा अल्पसंख्यकों और पीडीए वर्ग के वोट कटवाने की साजिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-7 के जरिए वोटों में गड़बड़ी की जा रही है और भाजपा चुनाव जीतने के लिए यह रणनीति अपना रही है।
हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत है।
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