बोलता सच,बाराबंकी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और गैस आपूर्ति पर उसके असर के बीच बाराबंकी जिले में हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। प्रशासन द्वारा एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता के दावों के बावजूद जमीनी स्थिति कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी छोड़कर आधी रात से गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगाने को मजबूर हैं।
मामला विकासखंड बंकी के बरेठी स्थित तिंदोला गांव का है, जहां एक युवक अपने बीमार माता-पिता के लिए गैस सिलेंडर लेने के लिए रात में ही घर से निकलने को विवश हुआ।
तिंदोला निवासी अरुण कुमार, जो शाहजहांपुर में माली का काम करते हैं, ने बताया कि उनकी मां ब्रेन हैमरेज और पिता कैंसर से पीड़ित हैं। दोनों बिस्तर पर हैं और उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है। इसके साथ ही दो छोटी बेटियों की पढ़ाई का भार भी उनके कंधों पर है।
घर में खाना बनाने के लिए गैस खत्म हो गई, जिससे रसोई ठप हो गई। मजबूरी में अरुण अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर गांव लौटे। बुधवार तड़के करीब 2 बजे वे घर से पैदल निकले और लगभग 8 किलोमीटर चलकर ‘अमित गैस एजेंसी’ पहुंचे, ताकि सुबह 3 बजे ही लाइन में सबसे आगे लग सकें।
अरुण ने बताया कि उन्होंने चार से पांच दिन पहले ही सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन बार-बार प्रयास के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिल सकी। एजेंसी के बाहर उनके जैसे सैकड़ों लोग घंटों इंतजार करते दिखे।
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ आपूर्ति में देरी ने गरीब परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यह स्थिति प्रशासन के उन दावों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें निर्बाध गैस आपूर्ति की बात कही जा रही है।
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