बोलता सच,इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार अल-सुबह एक भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। बंगाली चौराहे के पास एक कॉलोनी में घर के बाहर चार्जिंग पर लगी इलेक्ट्रिक कार में अचानक आग लग गई, जो देखते ही देखते तीन मंजिला मकान तक फैल गई। इस दर्दनाक घटना में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस हादसे के बाद देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, यह पहली घटना नहीं है—पिछले कुछ वर्षों में ईवी में आग लगने के कई मामले सामने आते रहे हैं।
भारत में ईवी हादसों का आंकड़ा
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के eDAR पोर्टल के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच देश में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी 23,865 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें से केवल 26 मामलों में आग लगने की पुष्टि हुई। यानी कुल हादसों की तुलना में आग लगने की घटनाएं बेहद कम हैं, लेकिन उनकी गंभीरता अधिक है।
2026 में भी ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के हापुड़ और गाजियाबाद की घटनाएं प्रमुख हैं। इनमें कई बार चार्जिंग पॉइंट में खराबी को आग का कारण माना गया।
ईवी में आग लगने के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक ईवी में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होने के बावजूद आग लगने के पीछे कुछ प्रमुख कारण होते हैं:
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शॉर्ट सर्किट: 99% मामलों में बैटरी में शॉर्ट सर्किट के कारण ‘थर्मल रनअवे’ स्थिति बनती है, जिसमें बैटरी का तापमान तेजी से बढ़कर आग का रूप ले लेता है।
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खराब बैटरी या डिजाइन: निम्न गुणवत्ता के सेल, कमजोर डिजाइन या खराब बीएमएस सिस्टम जोखिम बढ़ाते हैं।
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चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: पुराने वायरिंग सिस्टम, ढीले प्लग, खराब अर्थिंग या लोकल चार्जर का उपयोग आग की बड़ी वजह बनता है।
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लगातार उपयोग के बाद तुरंत चार्जिंग: बैटरी के गर्म होने पर तुरंत चार्जिंग करने से खतरा बढ़ जाता है।
चार्जिंग के दौरान सबसे ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि ईवी में सबसे ज्यादा जोखिम चार्जिंग के समय होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 90% मामलों में आग की शुरुआत बैटरी से नहीं, बल्कि चार्जिंग पॉइंट, सॉकेट या वायरिंग से होती है।
इंदौर हादसे में भी शुरुआती जांच में चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है, जिससे निकली चिंगारी ने कार को अपनी चपेट में ले लिया।
सरकार के सुरक्षा कदम
ईवी हादसों को देखते हुए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं:
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एआईएस:156 और एआईएस:038 (रेव 2) जैसे उन्नत बैटरी सुरक्षा मानक लागू किए गए
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डीआरडीओ, आईआईएससी और एनएसटीएल के विशेषज्ञों की जांच समिति गठित की गई
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कन्फॉर्मिटी ऑफ प्रोडक्शन (CoP) नियमों के जरिए निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित की गई
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खराब वाहनों के रिकॉल और कंपनियों पर जुर्माने के निर्देश जारी किए गए
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सावधानी ही सुरक्षा
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ईवी चार्जिंग के लिए मानक उपकरणों का ही उपयोग करें, घर के बाहर चार्जिंग पॉइंट लगाने से बचें और सही अर्थिंग सुनिश्चित करें। साथ ही, बैटरी को ठंडा होने के बाद ही चार्जिंग पर लगाना चाहिए।
इंदौर की यह घटना एक चेतावनी है कि तकनीक के साथ सुरक्षा मानकों और सावधानियों का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
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