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एक ही दस्तावेज से दो सरकारी नौकरियां करने वाले कर्मचारी को 7 साल की सजा

Bolta Sach News
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Two government offices with the same document
बोलता सच,बाराबंकी : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और प्रतापगढ़ जिलों से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने कथित रूप से एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र और दस्तावेजों के आधार पर दो अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी कर ली। अदालत के आदेश के बाद इस मामले का खुलासा हुआ और आरोपी को सजा सुनाई गई।

सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव निवासी जयप्रकाश सिंह पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति हासिल की और वर्षों तक दोनों जगह से वेतन व भत्ते लेते रहे।

जांच में सामने आया कि जयप्रकाश सिंह की पहली नियुक्ति 26 दिसंबर 1979 को प्रतापगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में नॉन-मेडिकल असिस्टेंट (एनएमए) के पद पर हुई थी। इसके बाद जून 1993 में उन्होंने बाराबंकी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर भी नौकरी प्राप्त कर ली। दोनों नियुक्तियों में लगभग समान दस्तावेजों का उपयोग किया गया और वे लंबे समय तक दोनों विभागों में कर्मचारी के रूप में दर्ज रहे। सरकारी नियमों के अनुसार एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही सरकारी पद पर कार्य कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद वे करीब 17 वर्षों तक दोनों जिलों में नौकरी करते रहे और दोनों जगह से वेतन प्राप्त करते रहे।

मामले का खुलासा आरटीआई के माध्यम से हुआ। बाराबंकी शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने 20 फरवरी 2009 को इसकी शिकायत की थी। सूचना के अधिकार के तहत दोनों विभागों से मांगी गई जानकारी में पता चला कि जयप्रकाश सिंह एक ही समय में प्रतापगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और बाराबंकी के शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। इसके बाद उनके खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई।

मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही सरकारी खजाने से प्राप्त किए गए वेतन की वसूली के भी आदेश दिए गए हैं। अभियोजन अधिकारी अनार सिंह के अनुसार अदालत का यह फैसला सरकारी तंत्र में निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।


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