बोलता सच,लखनऊ : अगर प्रतिभा को सही दिशा और अवसर मिल जाए, तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश की बेटियों ने इसे सच कर दिखाया है। अब वे केवल सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें साकार कर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रही हैं।
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से जुड़ी तीन बेटियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस योजना के माध्यम से अब तक 250 से अधिक बेटियां विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो चुकी हैं और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी भूमिका निभा रही हैं।
इस पहल के पीछे योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य रहा है कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं, खासकर बेटियों को सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। वर्ष 2021 में शुरू हुई इस योजना से अब तक एक लाख से अधिक अभ्यर्थी जुड़ चुके हैं। यह योजना उन छात्रों के लिए खास मददगार साबित हो रही है, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते।
सफलता की प्रेरक कहानियां
गाजियाबाद की मानसी ने सिविल सेवा परीक्षा में 444वीं रैंक हासिल कर यह साबित किया कि सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। उन्होंने घर पर रहकर तैयारी की और योजना से मिले मार्गदर्शन का लाभ उठाया। झांसी की अदिति सिंह ने 859वीं रैंक प्राप्त की। खास बात यह रही कि उन्होंने खुद तैयारी के साथ-साथ अन्य छात्रों को भी पढ़ाकर मदद की।
आगरा की तनीषा सिंह ने 930वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और प्रदेश का नाम रोशन किया। उन्होंने भी घर से ही ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की और योजना का लाभ लिया।
वहीं, लखनऊ की कीर्तिका सिंह ने 2022 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी का पद प्राप्त किया। किसान परिवार से आने वाली कीर्तिका ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तैयारी कर यह मुकाम हासिल किया।
बेटियों के लिए बन रही मजबूत नींव
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने न केवल शिक्षा को सुलभ बनाया है, बल्कि बेटियों के आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दी है। अब वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।
क्या है संदेश?
इन सफलताओं से यह स्पष्ट है कि सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलने पर यूपी की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यह योजना उन लाखों युवाओं के सपनों को साकार कर रही है, जो कभी संसाधनों की कमी के कारण अधूरे रह जाते थे।
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