डार्क पैटर्न पर कार्रवाई
विमानन मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कई एयरलाइंस और ट्रैवल एजेंट टिकट बुकिंग और वेब चेक-इन के दौरान तथाकथित “डार्क पैटर्न” का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके जरिए यात्रियों को मनचाही सीट चुनने के लिए अतिरिक्त शुल्क देने के लिए प्रेरित किया जाता था, जबकि बिना शुल्क वाली सीटों की उपलब्धता सीमित रखी जाती थी।
कई मामलों में देखा गया कि एक ही पीएनआर पर यात्रा कर रहे परिवार या समूह के सदस्यों को अलग-अलग सीटों पर बैठा दिया जाता था, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता था।
एयरलाइंस की कमाई पर असर
सरकार के इस फैसले से एयरलाइंस कंपनियों की अतिरिक्त कमाई पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। दरअसल, सीट चयन शुल्क एयरलाइंस के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।
उदाहरण के तौर पर IndiGo के वित्तीय आंकड़ों में भी यह रुझान देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में कंपनी की अन्य स्रोतों से आय 13.6 प्रतिशत बढ़कर 2,446.2 करोड़ रुपये हो गई, जबकि टिकट बिक्री से आय में केवल 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कम किराया, ज्यादा शुल्क का मॉडल
सूत्रों के अनुसार, एयरलाइंस कंपनियां अक्सर बेस टिकट किराया कम रखती हैं ताकि अधिक यात्रियों को आकर्षित किया जा सके। इसके बाद सीट चयन, अतिरिक्त सामान और अन्य सेवाओं के जरिए अलग से शुल्क लेकर मुनाफा कमाया जाता है।
पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इससे यात्रियों की शिकायतों में कमी आएगी और उन्हें अधिक सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब देश में हवाई यात्रा की मांग तेजी से बढ़ रही है और सरकार की विभिन्न योजनाओं के चलते अधिक लोग हवाई सफर की ओर आकर्षित हो रहे हैं।