राज्य में मिशन शक्ति, बीट पुलिसिंग, हेल्पलाइन 1090 और यूपी-112 जैसी व्यवस्थाओं ने मिलकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जहां सुरक्षा के दावे अब जमीनी हकीकत में बदलते नजर आ रहे हैं।
कानून-व्यवस्था से मजबूत हुई नींव
सरकार ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई। गैंगस्टर एक्ट और एनएसए जैसे सख्त कानूनों के इस्तेमाल के साथ अवैध संपत्तियों की जब्ती ने अपराध के नेटवर्क को कमजोर किया। इसके परिणामस्वरूप महिलाओं के खिलाफ अपराधों में गिरावट दर्ज की गई और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की भावना मजबूत हुई।
मिशन शक्ति: सुरक्षा से सशक्तिकरण तक
महिला सुरक्षा को संस्थागत रूप देने के लिए प्रदेश के हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए। करीब 40,000 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित कर महिला अपराधों से जुड़ी इकाइयों को इससे जोड़ा गया, जिससे शिकायतों के निस्तारण में तेजी आई।
आंकड़ों में दिखता बदलाव
सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच दुष्कर्म के मामलों में 33.92%, महिलाओं और बच्चों के अपहरण में 17.03%, दहेज हत्या में 12.96% और घरेलू हिंसा में 9.54% की कमी दर्ज की गई। महिला एवं बाल अपराधों के निस्तारण में 98.90% के साथ प्रदेश देश में अग्रणी रहा, जबकि लंबित मामलों की दर मात्र 0.20% रही।
बीट पुलिसिंग और महिला भागीदारी
महिला सुरक्षा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 19,839 महिला पुलिसकर्मियों की नियुक्ति और 9,172 महिला बीट्स का गठन किया गया। साथ ही पुलिस भर्ती में 20% आरक्षण के चलते आज 44,000 से अधिक महिलाएं पुलिस बल का हिस्सा हैं, जो सुरक्षा के साथ सशक्तिकरण का भी संकेत है।
हेल्पलाइन और तेज रिस्पॉन्स सिस्टम
महिला हेल्पलाइन 1090, 181 और यूपी-112 के एकीकरण से मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र तैयार हुआ है। यूपी-112 ने 3 करोड़ से अधिक कॉल अटेंड की हैं और इसका रिस्पॉन्स टाइम घटकर 6 मिनट 41 सेकंड रह गया है। यह बदलाव संकट के समय त्वरित सहायता सुनिश्चित करता है।
बहुस्तरीय सुरक्षा अभियान
राज्य में एंटी रोमियो स्क्वायड के गठन के साथ मिशन शक्ति 5.0, ऑपरेशन गरुड़, ऑपरेशन शील्ड, ऑपरेशन बचपन और ऑपरेशन रक्षा जैसे अभियानों के जरिए सुरक्षा को व्यापक स्तर पर लागू किया गया। मानव तस्करी रोकने के लिए 75 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को थानों में परिवर्तित किया गया।
तकनीक से मजबूत हुई सुरक्षा
प्रहरी बीट पुलिसिंग ऐप, UPCOP और यक्ष ऐप जैसे डिजिटल टूल्स के जरिए पुलिसिंग को स्मार्ट बनाया गया। 12 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थानों की शुरुआत से अपराध नियंत्रण और जांच की प्रक्रिया तेज हुई है।
तेज न्याय और संस्थागत सुधार
महिलाओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटान के लिए 81 फास्ट ट्रैक कोर्ट को स्थायी किया गया और 212 अस्थायी कोर्ट जारी रखे गए। फॉरेंसिक लैब की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 करने से जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार हुआ है।
सुरक्षा से सम्मान तक की यात्रा
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा अब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक सम्मान और सशक्तिकरण का आधार बन चुकी है। सख्त कानून, आधुनिक तकनीक और बेहतर पुलिसिंग के समन्वय से प्रदेश में महिलाओं के लिए सुरक्षित और आत्मविश्वासी माहौल तैयार हुआ है।