बोलता सच,नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार हर स्तर पर सक्रिय है और सभी हितधारकों के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया गया है, जो रोज बैठक कर हालात की समीक्षा कर रहा है।
लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई चुनौतियों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह मार्ग भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और यहां उत्पन्न संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
24 घंटे निगरानी, सप्लाई बनाए रखने पर जोर
करीब 25 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सुचारू रखने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है। उन्होंने माना कि होर्मुज से जहाजों का आना-जाना चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन भारत हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर, इथेनॉल बना सहारा
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में इथेनॉल उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ईंधनों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
तेल आयात में विविधता और भंडारण क्षमता बढ़ी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में भी विविधता लाई है। पहले जहां देश 27 देशों से तेल-गैस आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। उन्होंने बताया कि देश में कच्चे तेल का भंडारण बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है।
जहाजों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी सामान लेकर आने वाले सभी जहाज सुरक्षित भारत पहुंचें। उन्होंने बताया कि लगातार प्रयासों के चलते होर्मुज क्षेत्र में फंसे कई भारतीय जहाज सुरक्षित लौट चुके हैं।
भारत पर असर कितना?
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की करीब 50 प्रतिशत तेल और 55 प्रतिशत गैस आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है। फिलहाल इस क्षेत्र में भारत के करीब 22 जहाज फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारतीय नौसेना भी सक्रिय है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियों पर एक साथ काम कर रही है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर किसी भी संकट का असर कम से कम हो।
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