ऐसे करता था गिरोह काम
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को लोन या सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए वे उनसे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज ले लेते थे। इन दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड निकलवाकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे।
इसके बाद उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर और ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था। कई मामलों में आरोपी लोगों से उनके बैंक खाते की पासबुक और एटीएम कार्ड भी ले लेते थे और बदले में कमीशन का लालच देते थे।
मुख्य आरोपी करता था संचालन
पुलिस के अनुसार, गिरोह का संचालन ध्रुव साहनी कर रहा था, जो अन्य सदस्यों को निर्देश देता था।
बरामद हुआ सामान
गिरफ्तार आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, दो लैपटॉप, आठ फर्जी मोहर, 28 हस्ताक्षरित चेक, चार पासबुक, तीन एटीएम कार्ड और दो चेकबुक बरामद किए गए हैं।
अन्य आरोपी फरार
इस मामले में वाराणसी, भदोही और लखनऊ से जुड़े तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।