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राज्यसभा पहुंचने पर नीतीश कुमार को लेकर भावुक हुए अशोक चौधरी, बोले— बिहार को खलेगी कमी

Bolta Sach News
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Nitish Kumar on reaching Rajya Sabha
बोलता सच,पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि वह 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। इस बीच उनके करीबी सहयोगी और मंत्री अशोक चौधरी ने इस फैसले को लेकर भावुक प्रतिक्रिया दी है।
शनिवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार का बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर जाना पूरे राज्य के लिए भावुक क्षण है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के केंद्रबिंदु रहे हैं और उनकी कमी हर किसी को महसूस होगी।
उन्होंने कहा कि बिहार के लोग नहीं चाहते थे कि नीतीश कुमार यहां से जाएं, लेकिन समय और परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने यह निर्णय लिया है। चौधरी ने कहा कि किसी व्यक्ति का पद पर रहना या न रहना उतना महत्वपूर्ण नहीं होता, जितना उसका राज्य के लिए प्रभावी होना जरूरी होता है।
अशोक चौधरी ने आगे कहा कि नीतीश कुमार के कार्यों से प्रभावित लोगों के लिए यह एक भारी और भावुक पल है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने बिहार के विकास में उनके योगदान को करीब से देखा है, वे इस बदलाव को आसानी से नहीं स्वीकार कर पा रहे हैं।

ममता बनर्जी पर साधा निशाना

इस दौरान ममता बनर्जी के पेट्रोल-डीजल को लेकर दिए गए बयान पर भी अशोक चौधरी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इस समय चुनावी माहौल में हैं और उनकी कोशिश है कि एनडीए सरकार की नीतियों को प्रभावी न होने दिया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में उनकी सत्ता में वापसी मुश्किल है।

तेजस्वी यादव पर भी टिप्पणी


तेजस्वी यादव द्वारा बिहार में बढ़ते अपराध के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि उन्हें आंकड़ों का सही अध्ययन करने की जरूरत है।

निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर लगे पोस्टरों पर उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कोई भी आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार शिक्षित हैं और फिलहाल पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। इस तरह, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।

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