बोलता सच,नई दिल्ली : देश के बड़े महानगरों में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने संसद में गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से कहा कि बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई जैसे शहरों में एक आम यात्री हर साल 100 से 168 घंटे तक ट्रैफिक जाम में फंसा रहता है, जिससे देश की उत्पादकता और लोगों की जीवन गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ रहा है।
राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि सुबह-शाम के समय इन महानगरों में सड़कें चलने के बजाय पार्किंग स्थल जैसी प्रतीत होती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली के आश्रम, धौला कुआं या NH-8 (दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे) जैसे मार्गों पर यात्रा करना बेहद कठिन हो गया है।
उन्होंने कहा कि ट्रैफिक जाम की वजह से लोग अपने वाहनों में बैठकर ही दफ्तर का काम करने को मजबूर हैं और यहां तक कि ऑनलाइन मीटिंग भी कार में ही अटेंड कर रहे हैं। उन्होंने इसे केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बताया।
आंकड़े प्रस्तुत करते हुए चड्ढा ने बताया कि बेंगलुरु में एक यात्री हर साल लगभग 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है, जबकि दिल्ली में यह आंकड़ा 104 घंटे है। इसी तरह पुणे में 152 घंटे, मुंबई में 126 घंटे, कोलकाता में 110 घंटे और चेन्नई में 100 घंटे प्रतिवर्ष ट्रैफिक में व्यतीत होते हैं।
उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ईंधन की खपत बढ़ती है, वायु प्रदूषण में इजाफा होता है और लोगों की जीवन गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हर साल देश में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और पिछले वर्ष लगभग ढाई करोड़ नए वाहनों का पंजीकरण हुआ।
राघव चड्ढा ने सरकार से मांग की कि महानगरों में ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए “नेशनल अर्बन डी-कंजेशन मिशन” शुरू किया जाए। इसके तहत बेहतर सार्वजनिक परिवहन, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और वैज्ञानिक पार्किंग नीति लागू करने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस समस्या पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
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