राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति “व्यक्तिगत विदेश नीति” बन गई है। उनके अनुसार, यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को कमजोर कर रही है और इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष, भारत के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहे हैं। ऐसे समय में देश को संतुलित, स्पष्ट और दूरदर्शी कूटनीति की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सके।
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्र, संतुलित और रणनीतिक रही है, जिसने देश को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाया। लेकिन वर्तमान में उस पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह विदेश नीति को व्यक्तिगत छवि से ऊपर उठाकर संस्थागत मजबूती दे।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में निरंतरता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी होती है। यदि नीति में स्पष्टता नहीं होगी, तो इसका असर व्यापार, सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।
अंत में उन्होंने सरकार से अपील की कि वह वैश्विक मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए एक स्थिर और मजबूत रणनीति अपनाए, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय साख बनी रहे और देश वैश्विक मंच पर प्रभावी भूमिका निभा सके।