यह निर्देश इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेशों के बाद जारी किए गए हैं। हाई कोर्ट ने 14 जनवरी 2026 को पुलिस को निर्देश देते हुए कहा था कि जांच के बाद जिन मामलों में तथ्य गलत पाए जाएं, उनकी सूची तैयार की जाए और ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
डीजीपी ने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में जांच के बाद पुलिस कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) दाखिल करती है और आरोपी निर्दोष पाया जाता है, तो यह भी जांच की जाएगी कि कहीं पुलिस तंत्र का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। यदि जांच में यह सामने आता है कि शिकायतकर्ता या गवाहों ने जानबूझकर झूठे या भ्रामक तथ्य पेश किए हैं, तो उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, ताकि दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
दरअसल, प्रदेश में अक्सर आपसी विवादों के चलते लोग फर्जी मुकदमे दर्ज करा देते हैं, जो बाद में जांच या सुनवाई के दौरान गलत साबित होते हैं। ऐसे मामलों की संख्या कोर्ट में लगातार सामने आ रही थी, जिसे देखते हुए हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
अब इन निर्देशों के बाद यूपी पुलिस भी पूरी तरह सख्त हो गई है। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति झूठा मुकदमा दर्ज कराता है या झूठी गवाही देता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।